भारत में चल रही है हेल्थ टॉनिक कंपनियों की लूट

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सचिन तेंदुलकर, महिंदर सिंह धोनी, विराट कोहली आदि का नाम तो अपने भी सुना होगा, अपने अक्सर इन्हे टी वी पर एक विज्ञापन में आते देखा होगा ! “Boost is Secret of My Energy”. अब यह सच में बताये क्या इनके इतने शानदार खेल का राज BOOST है ?




अगर इनके खेल का राज Boost है तो दोनों पर बनी फिल्म में इनके स्ट्रगल और मेहनत को क्यों दिखाया गया 3 घंटे तक, सिर्फ दो मिनट टी. वी. पर आकर बोल देते मैंने Boost पिया और फिर मैं कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा |

शायद आपको सुनकर हैरानी होगी की हर साल देश के लोग 2500 करोड़ से ज्यादा का विदेशी हेल्थ टॉनिक खा जाते हैं, स्टार्स द्वारा दिए विज्ञापनों पर विश्वास करके |  देश की सबसे बड़ी लैब “Delhi All India Institute” और इस इंस्टिट्यूट के हेड है, डॉ. जैन और डॉ जैन की रिपोर्ट के मुताबिक़ इन हेल्थ टॉनिक में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे इसे हेल्थ टॉनिक कहा जाये |

यहाँ सिर्फ बूस्ट की बात नहीं हो रही है बूस्ट तो एक उदाहरण है बूस्ट, माल्टोवा, बॉर्न्विटा, कॉम्पलैन, प्रोटीनेक्स आदि सभी की बात हो रही है |

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आपने कभी सोचा आख़िर यह सभी कम्पनीज हेल्थ टॉनिक में मिलाती क्या है ? आपको जानकार हैरानी होगी इन हेल्थ टॉनिक्स को बनाने के लिए इस्तेमाल होता है, मूंगफली की खली (सिंघदाना), अगर आप मूंगफली और सरसो में से तेल को निकाल दे तो उसका जो कचरा बचता है, उसे कहते है खली |

भारत में ऐसे खली को गाय, भैंस, बैल जैसे बड़े मवेशियों को खिलाई जाती है | जिस चीज़ को जानवर खाते है उसी चीज को अच्छे से पीसकर उसमे मीठा और फ्लेवर डाल कर बाज़ारो में बेचा जाता है और उसी 20 से 25 रूपए में बिकने वाली खली को पढ़े लिखे लोग 300 से 400 रूपए में खरीद कर अपने बच्चों को देते है |

इससे अच्छा आप गुड़ में मूंगफली डाल कर बच्चों को दे इससे को प्रोटीन आपके बच्चे को मिलेगा वो 100 इन हेल्थ ड्रिंक्स के पैकेट्स में भी नहीं मिलेगा | यह सब कम्पनीज लिखती हैं, की इसमें विटामिन, प्रोटीन, कैल्शियम आदि हैं, लेकिन आप बतायें  क्या आपने कभी आज तक किसी लैब से टेस्ट कराया हैं ? नहीं न इसी लिए उन कम्पनीज को पता जो दिखता हैं वही बिकता हैं, लिखने में कोई बुराई नहीं हैं |

ऐसे ही एक कंपनी हैं हॉर्लिक्स आपको फिर से जानकार हैरानी होगी की हॉर्लिक्स बनाने के लिए इस्तेमाल होता हैं गेहूं का आटा, चने का सत्तू और जौ |

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हॉर्लिक्स पर साफ़ साफ़ लिखा होता हैं “It’s Millet” और Millet का मतलब ही आटा/सत्तू होता हैं जिसे आप बजार से बड़े आराम से 60 से 70 रूपए प्रति किलो खरीद सकते हैं लेकिन कम्पनीज आपको बेचती हैं 350 से 450 रूपए किलो |

भारतीय बजार में अभी जितने भी हेल्थ टॉनिक हैं उससे आपके बच्चे हो एक पैसे का हेल्थ नहीं मिलता लेकिन इसके बावजूद हम पढ़े लिखे लोग हर साल 2500 करोड़ से 3000 करोड़ के बीच का हर साल इन कम्पनीज का हेल्थ टॉनिक खा जाते हैं |

अगर विज्ञापन में कहा जाता हैं की इस डिब्बे में बादाम पड़े और डिब्बे की कीमत को बादाम जितनी कर देता हैं तो आप खुद बादाम लेकर, उसे पीसकर दूध में डाल कर क्यों नहीं दे सकते ? इससे आपके बच्चे को प्रोटीन और कैल्शियम भी मिलेगा और देश का पैसा भी बचेगा |

अगर कॉम्पलैन पीने से इंसान की लम्बाई बढ़ती तो सचिन तेंदुलकर के पास इतने पैसे तो होंगे की वो हर महीने एक डिब्बा ला कर कॉम्पलैन पी सके ? आपने बड़ी मेहनत से पैसे कमाए होते हैं फ़ालतू के विज्ञापन देख कर अपने ही पैसो से अपने बच्चो की सेहत खराब न करें, जागरूक बने |

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