मुस्लिम महिला ने बताई अपने खतने की दर्द भरी दास्ताँ

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पिछले महीने 22 अगस्त 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला दिया जिसमे उन्होंने ट्रिपल तलाक पर रोक लगा दी | साथ में केंद्र सरकार को 6 महीने के अंदर कानून बनाकर संसद में पास करने को कहा | अब देखने वाली बात यह है की ट्रिपल तलाक के खिलाफ रही मोदी सरकार कितनी जल्दी और कितना सख़्त कानून बनाती है |


फिलहाल ट्रिपल तलाक़ पर फैसला आने के बाद महिलाओं के खतने को बंद कराने और इसपर कानून बनाने की भी आवाज़ बढ़ने लगी है | एक मुस्लिम महिला ने बताया की ‘ख़तना’ या ‘ख़फ्ज़’ की प्रथा को सालों से बोहरा और शिया समुदाय के लोग इसकी पालना करते आए हैं |

हमारे समुदाय में आज भी छोटी बच्चियों के साथ ऐसा हो रहा है लेकिन कोई कानून न होने की वजह से इसपर न तो शिकायत की जा सकती है और न ही प्रशाषन हमारी मदद करता है | इस प्रथा में बच्ची के 7 साल के होने पर उसे उसकी दादी या दाई माँ या फिर डॉक्टर के पास लेकर जाया जाता है |

जहां उसके प्राइवेट अंक को काट दिया जाता है और इस प्रथा से होने वाला शरीर दर्द के साथ मानसिक पीड़ा ता उम्र उस बच्ची के साथ रह जाती है | इस प्रथा का एक मात्र उद्देश्य यह है की लड़की की योंन इच्छा को ख़तम कर देना या फिर दबा देना |

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बता दे की यूनाइटेड नेशन्स भी 6 फेबरेरी को महिलाओं के खतना के खिलाफ जीरो टॉलरेंस दिवस को खोषित कर चूका है | इस साल का थीम 2030 तक FGM के उन्मूलन के जरिए नए और अच्छे वैश्विक लक्ष्यों को पाना रखा है जिसमे महिलाओं पर होने वाले कुप्रथाओं के जरिये होने वाले अत्याचारों से छुटकारा दिलाना है |

सरकारी आंकड़ों के अनुसार दुनिया भर में लगभग 20 करोड़ बच्चियों का खतना किया जाता है | आपको जानकार हैरानी होगी की इनमे से 10 करोड़ से ज्यादा सिर्फ तीन देशों में ही किया जाता है मिस्र, इथियोपिया और इंडोनेशिया | भारत में इस प्रथा को मानने वाले दाऊदी बोहरा मजबूत व्यापारी मुस्लिम समुदाय के लोग है |


सरकारी आंकड़ों के हिसाब से करीब 10 लाख लोग मुंबई के आस पास रहते है जो की इस कुप्रथा में विशवास रखते है | यहाँ तक की दक्षिण मुंबई के मालाबार हिल्स में इनका मुख्यालय भी है | यहाँ पर भारत के सबसे अमीर मुस्लिम समुदाय के लोग रहते है और यही पर बोहरा धर्म गुरु बैठते है |

इस कुप्रथा के बारे में बताने वाली मुस्लिम महिला कहती है की वो हमेशा कहते हैं की एक छोटा सा कट है | बस हल्का सा कट है बहुत मामूली बात है | लेकिन कुछ घटनाएं ऐसी भी हुई है जहां वो छोटा सा कट बहुत खतरनाक साबित हुआ है | जाहिर सी बात है इस कट से खून बहुत ज्यादा बहता है और स्वास्थय से जुडी अन्य समस्याएं भी हो जाती है |

महिलाओं के खतने के बाद सिस्ट बनना, संक्रमण, बांझपन होना तो आम सी बात है | बच्चे के जन्म के समय भी बहुत बड़ी समस्या पैदा हो जाती है और बच्चे की मृत्यु जन्म के वक़्त होना बहुत आम सी बात है |

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उस महिला ने बताया मेरी माँ मुझे 7 साल की उम्र में टॉफी का वादा कर मुझे घर के पिछले रस्ते से एक अँधेरे कमरे में ले गयी जहां मुझे कुछ लोगो ने जबर-दस्ती जकड़ लिया और मेरा खतना कर दिया गया | मुझे बहुत सारे सालों तक यह पता नहीं चला की मेरे साथ ऐसा क्या और क्यों हुआ |

महिला ने कहा जब मैंने खतना होने के 20-21 सालों बाद पढ़ा तब मुझे एहसास हुआ की मेरे साथ धरम और धार्मिक आस्थाओं में अंधविश्वास के कारण क्या किया गया था | 2015 में बोहरा समुदाय की मुस्लिम महिलाओं ने एक जूट होकर “WeSpeakOut On FGM” नाम का एक कैंपेन शुरू किया था |

यहाँ उन महिलाओं ने आपस में एक दूसरे से अपने दुःख और खतने वाले दिन की दास्ताँ को एक दूसरे से साझा किया | इन महिलाओं ने Change.org पर एक कैम्पेन की शुरुआत भी की थी जिसमे इस प्रथा को बंद करने के लिए इन महिलाओं को 9000 से ज्यादा साइन मिल गए थे |

अब देखना यह होगा की मोदी सरकार ट्रिपल तलाक़ के बाद इस कुप्रथा से मुस्लिम महिलाओं को कितनी जल्दी और कैसे छुटकारा दिलाते है |

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