जरनैल सिंह भिंडरावाले के अनसुने तथ्य

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आज से लगभग 33 साल पहले पंजाब के अलगावादी नेता जरनैल सिंह भिंडरावाला भारतीय सेना द्वारा चलाये गए ऑपरेशन ब्लू स्टार (Operation Blue Star) में मारे गए थे | यह ऑपरेशन अमृतसर के स्वर्ण मंदिर पर चलाया गया था | आज हम आपको उनके जीवन के बारे में कुछ अनसुने तथ्य बताने जा रहे है |

जरनैल सिंह भिंडरावाला पंजाब में आज से लगभग तीन दशक पहले एक कट्टरवादी और चरमपंथी संत के रूप में उभरे, उनके विचार थे की अगर आपको अपना हक़ चाहिए तो उसके लिए हिंसा का रास्ता कोई गलत बात नहीं है |




1977 में जरनैल सिंह भिंडरावाला (Jarnail Singh Bhindranwale) को सिख प्रचारक की मुख्य शाखा दमदमी टकसाल का प्रमुख नियुक्त किया गया था | उस समय पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और एसजीपीसी अध्यक्ष जी एस टोहड़ा भी मजूद थे |

पंजाब में जरनैल सिंह भिंडरावाला 1978 के बाद से ही लोकप्रिय होना शुरू जो गए थे और अक्सर वह दमदमी टकसाल के हथियारबंद सिखों में घिरे रहते थे | जैसे-जैसे पंजाब में अकाली नेताओं का जनाधार घटता चला गया, वैसे-वैसे जरनैल सिंह भिंडरावाला की पंजाब में लोकप्रियता बढ़ती चली गयी |

आपको बता दें की 1978 में अकाली-निरंकारी झड़प में 13 अकाली मारे गए थे | तभी हुए रोष प्रदर्शन की अगुवाई जरनैल सिंह भिंडरावाला ने की थी | 1979 में जरनैल सिंह भिंडरावाला ने एस. जी. पी. सी. का चुनाव भी लड़ा था, लेकिन इसमें उनका प्रदर्शन कुछ ख़ास नहीं रहा था |

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पंजाब में जब सिखों की मांगे अपनी चरम सीमा पर पहुँच रही थी तो कई केंद्रीय नेता राज्य के हलातों को सुधारने के लिए जरनैल सिंह भिंडरावाला से मिले थे, जिसमें डॉ सुबरमणियम स्वामी भी मजूद थे |

अपनी कट्टर सोच और गतिविधियों के कारण जरनैल सिंह भिंडरावाला की चर्चा देश विदेश में होने लगी और अन्य धर्म गुरु जैसे तब के दिल्ली जामा मस्जिद के एहमद बुखारी भी उनके संपर्क में थे |

पंजाब में जरनैल सिंह भिंडरावाला द्वारा चल रहे घटनाक्रम पर सबकी नज़र टिकी हुई थी | उस समय देश विदेश के पत्रकार और मीडिया वाले भारत में डेरा लगाए बैठे थे | जरनैल सिंह भिंडरावाला की पत्नी का नाम प्रीतम कौर था और उनके दो बेटे है बड़े बेटे का नाम इंदरजीत सिंह और छोटे बेटे का नाम ईशर सिंह हैं |

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जरनैल सिंह भिंडरावाला पहले इंदिरा गाँधी के अच्छा मित्र थे | कांग्रेस ने जरनैल सिंह भिंडरावाला को मुख्यमंत्री बनने का न्योता भी दिया था लेकिन उन्होंने उसे ठुकरा दिया था |

माना यह भी जाता हैं की कांग्रेस एस. जी. पी. सी. पर अपनी हुकूमत चाहती थी जिसके चलते उन्होंने जरनैल सिंह भिंडरावाला को इतनी पावर दी थी, लेकिन जब हालात बिगड़ने लगे तो कांग्रेस ने सिखों के धर्म स्थान पर फौज़ भेज कर हिन्दू और सिखों में दिवार खड़ी कर दी |

जो आज भी कही न कही क़ायम हैं | पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री सरदार प्रकाश सिंह बादल हिन्दू-सिख एकता का प्रतीक हैं, जिन्होंने इस दिवार को बहुत हद तक ख़तम किया हैं |

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