गुप्ता जी का बेटा और मेरे माँ बाप

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हम इंसान यह तो जानते है की पैसो से खुशिया नहीं खरीदी जा सकती लेकिन फिर भी हम इंसान अपने बच्चो के दिमाग में इतना प्रेशर पैदा कर देते है की वो इम्तिहान में फेल होने के बाद या फिर नौकरी न मिलने पर सीधा आत्म हत्या की सोचने लगता है और कुछ कर भी लेते है |

नमस्कार, मेरा नाम है प्रतीक मल्होत्रा और आप सबका का स्वागत है भकत न्यूज़ के विशेष भाग 2 में, तो चलिए शुरू करते है |

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बच्चा जब जन्म लेता है तो माँ बाप उससे बहुत प्यार करते है, लेकिन असली प्यार तब तक ही होता है जब तक बच्चा बोलना नहीं सीखता | बोलना सिखने के साथ ही प्रेशर बन जाता है की सिर्फ अच्छे शब्दों का उच्चारण करे जैसे गुप्ता जी लड़का करता है | जिस बच्चे को नमस्ते का मतलब भी नहीं पता उसे भी कह रहे होते है गुप्ता जी के लड़के को देख कैसे सबको नमस्ते करता है |

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बच्चा थोड़ा और बड़ा होता है तो उसे स्कूल भेज दिया जाता है | फिर उसके ऊपर और प्रेशर डाल दिया जाता है, अभी बच्चे को ए बी सी भी ढंग से लिखना नहीं आता उसका बोल रहे होते है गुप्ता जी का लड़का देख फर्स्ट आया है तुझे भी क्लास में टॉप करना है | जिस बच्चे को साइकिल चलाना भी नहीं आता उसे भी लालच दे दिया जाता है तुझे साइकिल मिलेगा अगर तेरे इतने नंबर आये | बच्चे को पता भी नहीं लगता साइकिल के लालच में वो इस दुनिया में और सबसे बड़े रोग क्या सोचेंगे लोग के चकर में फस गया है |

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सबसे बड़ी और बुरी बात यह है की माँ बाप हमेशा अपने बच्चो को कहते है की बेटा बस पढ़ाई करले फिर तेरी लाइफ सेट फिर तुझे कोई कुछ नहीं कहेगा | मतलब आप अपने बच्चे को सचाई से अनजान रख रहे हो इसीलिए जब बच्चा अपनी दसवीं पास करता है उसे पता ही नहीं होता की उसने क्या सब्जेक्ट लेना है या फिर वो बनना क्या चाहता है ? फिर वही माँ बाप बच्चे को कह रहे होते है की गुप्ता जी के बेटे ने डॉक्टर की पढ़ाई की है अच्छा पैसा कमा रहा है | स्कूल के बाद कॉलेज का प्रेशर शुरू कर दिया जाता है | गुप्ता जी के बेटे ने इतने ज्यादा नंबर लाये की अब उसकी इतने लाख की नौकरी लगी बड़े हस्पताल में |

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