सज़ा सुनाते हुए जज़ ने आसाराम से कह डाली यह बात

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जैसा की हम सब जानते है आसाराम को नाबालिक के साथ रेप करने के मामले में उम्र कैद की सज़ा सुनाई जा चुकी है | सज़ा सुनाने वाली जोधपुर की एक विशेष ‘पॉक्सो’ अदालत ने कहा है कि ‘‘संत कहे जाने के’’ के बावजूद आसाराम ने एक बेहद घृणित कार्य को अंजाम दिया है |

आपको बता दे की यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अदालत के विशेष न्यायाधीश मधुसूदन शर्मा ने 453 पन्नों अपने लम्बे चौड़े फैंसले में कहा की “आसाराम ने ना केवल अपने अनुयायियों की आस्था को ठेस पहुंचायी, बल्कि आम लोगों में संतों की प्रतिष्ठा भी धूमिल की है |”

फैंसला सुनाये जाने के बाद अधिरिक्त सत्र में न्यायाधीश ने कहा की, “उनके (पीड़िता के पिता) मन में आसाराम के लिए इतना सम्मान था कि उन्होंने अपने बेटे और बेटी, दोनों को मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में आसाराम के गुरुकुल पढ़ने के लिए भेज दिया था, लेकिन उस ने बुरी शक्तियों के प्रभाव से मुक्त कराने के बहाने पीड़िता को अपने आश्रम बुलाकर उससे बलात्कार किया |”

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जैसा की हम सब जानते है स्वयंभू बाबा आसाराम को बलात्कार के मामले में 25 अप्रैल को सज़ा सुनाई गयी थी यह पिछले छह महीनों में दूसरा ऐसा मामला है जिसमे देश के स्वयंभू बाबा को बलात्कार की सज़ा सुनाई गयी हो |

न्यायाधीश मधुसूदन शर्मा ने जोधपुर सेंट्रल जेल के अंदर लगाई गयी स्पेशल अदालत में आसाराम को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सज़ा के साथ साथ उसे 1 लाख रूपए का जुरमाना भी लगाया |

यह पूरा मामला 6 नवंबर 2013 को पॉक्सो अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आसाराम और उसके अन्य सहआरोपियों पर पुलिस द्वारा दर्ज़ किया गया था |

आपको बताना चाहेंगे की उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में रहने वाले पीड़िता अपने भाई के साथ मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा स्थित आसाराम के ही आश्रम में अपनी पढ़ाई को पूरा कर रही थी | आसाराम को 1 सितम्बर 2013 में इंदौर से जोधपुर गिरफ्तार करके लाया गया था और 2 सितम्बर को जोधपुर पुलिस ने इसे न्यायिक हिरासत में ले लिया था |

यही नहीं आसाराम पर तो गुजरात के सूरत में भी एक बलात्कार का मामला दर्ज़ था | इसके बावजूद इसने कुल 12 बार जमानत याचिका दर्ज़ की थी, जिसमे 6 बार निचली अदालत में, 3 बार राजस्थान उच्च न्यायालय और 3 बार उच्चतम न्यायालय लेकिन हर बार अदालत जमानत याचिका को खारिज़ करती रही |

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